बिहार की प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (पैक्स) को कंप्यूटरीकृत करने की मुहिम में राज्य ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। पहले चरण में अब तक 4,477 पैक्सों को कंप्यूटरीकृत किया जा चुका है, जिससे इन समितियों के दैनिक कार्यों को कंप्यूटर के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इनमें से 292 पैक्स को ई-पैक्स के रूप में मान्यता दी गई है।
कंप्यूटरीकरण के लाभ
- पारदर्शिता और सुविधा: पैक्सों के कंप्यूटरीकरण से उनके कार्यों में पारदर्शिता आई है, जिससे अनियमितता और धोखाधड़ी पर रोक लगाना संभव हो गया है।
- डेटा प्रबंधन: किसानों के रिकॉर्ड, ऋण संबंधी जानकारी और अन्य वित्तीय आंकड़ों को डिजिटल रूप में संग्रहित किया जा रहा है, जिससे डेटा प्रबंधन में सुधार हुआ है।
- वित्तीय समावेशन: कंप्यूटरीकरण के माध्यम से पैक्स अन्य सहकारी समितियों और सहकारी विभागों से आसानी से जुड़ पाए हैं, जिससे किसानों के बैंक खातों में सीधे राशि पहुंच रही है।
भविष्य की योजनाएँ
राज्य सरकार ने दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई है, जिसमें शेष सभी पैक्सों को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। सहकारिता मंत्रालय ने बिहार सरकार को पैक्स के कंप्यूटरीकरण के लिए वित्तीय प्रावधान करने का निर्देश दिया है।
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FAQ
- कंप्यूटरीकरण का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य पैक्सों के कार्यों को आसान और पारदर्शी बनाना है। - कितने पैक्स पहले चरण में कंप्यूटरीकृत किए गए हैं?
पहले चरण में 4,477 पैक्सों को कंप्यूटरीकृत किया गया है। - ई-पैक्स क्या होते हैं?
ई-पैक्स वे पैक्स होते हैं जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मान्यता प्राप्त होती है, जिससे उनके संचालन में अधिक सुविधा होती है।